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PM मोदी ने रांची में 40 हजार लोगों के साथ किया योग और बोले-धर्म और जाति से ऊपर है योग

पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को झारखंड के रांची में योग किया। पीएम मोदी के साथ तकरीबन 40 हजार लोगों ने भी योग किया। इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हरियाणा के रोहतक में राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ योग किया।

गरीब और आदिवासियों तक पहुंचाना है योग : प्रधानमंत्री मोदी

इस दौरान प्रधानमंत्री ने योग शिविर को संबोधित करते कहा कि योग सबका है और सबके लिए है। आप सभी को, पूरे देश और दुनिया को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। योग के दुनिया भर में प्रसार में मीडिया के हमारे साथी, सोशल मीडिया से जुड़े लोग जिस तरह अहम भूमिका निभा रहे हैं, वो भी बहुत महत्वपूर्ण है। मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूं।

इस बार ‘योगा फॉर हार्ट केयर’ की थीम पर यह आयोजन हो रहा है। इसे लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि अब मुझे आधुनिक योग की यात्रा शहरों से गांवों की तरफ ले जानी है, गरीब और आदिवासी के घर तक ले जानी है। उन्होंने कहा कि मुझे योग को गरीब और आदिवासी के जीवन का भी अभिन्न हिस्सा बनाना है। ये गरीब ही हैं जो बीमारी की वजह से सबसे ज्यादा कष्ट झेलते हैं।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के बदलते समय में, इलनेस से बचाव के साथ-साथ वेलनेस पर हमारा फोकस होना जरूरी है। यही शक्ति हमें योग से मिलती है, यही भावना योग की है, पुरातन भारतीय दर्शन की है। योग सिर्फ तभी नहीं होता जब हम आधा घंटा जमीन या मैट पर होते हैं। योग अनुशासन है, समर्पण है और इसका पालन पूरे जीवन करना होता है। योग आयु, रंग, जाति, संप्रदाय, मत, पंथ, अमीरी-गरीबी, प्रांत, सरहद के भेद से परे है।

प्रधानमंत्री के कंधे पर फिर लहराया असमिया स्वाभिमान का प्रतीक ‘गमछा’

गुवाहाटी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुक्रवार को किए गए योगासन के दौरान उनके कंधे पर एक बार फिर से लहराता दिखा असमिया स्वाभिमान का प्रतीक चिह्न ‘असमिया फूलाम गमछा’। शुक्रवार को प्रधानमंत्री के कंधे पर उस समय फिर से यह पूलाम गमछा लहराता दिखा, जब वे रांची में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम में योगासन करने पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री द्वारा इस प्रकार असमिया संस्कृति एवं असमिया स्वाभिमान के प्रतीक चिह्न को सम्मान देने को लेकर असमवासियों में काफी खुशी देखने को मिले। प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही नरेन्द्र मोदी जिस प्रकार फूलाम गमछा को अपने गले में अनेक अवसर पर पहना करते हैं, उससे असमिया फूलाम गमछा को विश्वस्तर पर पहचान मिल रही है।

प्रधानमंत्री मोदी फूलाम गमछा के प्रति अपना सम्मान बार-बार व्यक्त करते हैं। इतना ही नहीं असम और पूरे पूर्वोत्तर के प्रति उनका हमेशा ही विशेष लगाव देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी जितनी बार पूर्वोत्तर में आ चुके हैं, ऐसा पहले कभी भी किसी प्रधानमंत्री द्वारा नहीं किया गया। प्रधानमंत्री के पूर्वोत्तर प्रेम की वजह से ही उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 के चुनाव से अधिक वोट मिला। प्रधानमंत्री मोदी की जो लोकप्रियता पूर्वोत्तर में दिखती है, ऐसा किसी भी प्रधानमंत्री के लिए पहले नहीं देखी गई।

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