Breaking News

लोकसभा चुनाव 2019: नतीजों के लिए इस बार भी करना होगा एक महीने का इंतजार

रायपुर: छत्तीसगढ़ में लोकसभा 2019 के तीसरे चरण का मतदान संपन्न् हो गया और ईवीएम स्ट्रांग रूम में सील कर दी गई। अब नतीजों के लिए एक बार फिर से एक महीने का इंतजार करना है। यह इंतजार यहां के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हमेशा भारी पड़ता है लेकिन हर बार यही होता आया है।

लोकसभा के चुनाव सात चरणों में संपन्न् होंगे। उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में सातवें चरण में 19 मई को वोटिंग है। 23 मई को मतगणना होगी और परिणाम आएंगे। तो जिनके यहां अंतिम चरण या छठवें चरण में वोटिंग होगी उन्हें तो ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा लेकिन छत्तीसगढ़ में प्रत्याशियों की सांस एक महीने तक अटकी रहेगी।

अब मतदान खत्म होने बाद यहां नेता और कार्यकर्ता एक ओर से राहत महसूस कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर यह सोचकर भी परेशान हैं कि अब एक महीने तक वक्त कैसे काटा जाए। छत्तीसगढ़ के हिस्से में यह इंतजार हर बार आता है। इस बार भी आया है।

छत्तीसगढ़ में पहले तीन चरणों में हुआ मतदान

छत्तीसगढ़ में पहले तीन चरणों में मतदान हुआ है। पहले चरण में 11 अप्रैल को नक्सल प्रभावित बस्तर में वोट डाले गए। इसके बाद राजनांदगांव, महासमुंद और कांकेर की नक्सल प्रभावित सीटों पर 18 अप्रैल को मतदान हुआ। मंगलवार यानी 23 अप्रैल को बची हुई सात सीटों पर मतदान हुआ।

रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़, जांजगीर चांपा, सरगुजा और कोरबा सीटों पर प्रत्याशियों के भाग्य ईवीएम में कैद हो गए। ईवीएम सील कर स्ट्रांग रूम में भारी सुरक्षा में रखवा दी गई है। 23 मई को स्ट्रांग रूम का ताला खुलेगा और तब पता चलेगा कि वोटरों ने किसपर भरोसा जताया है। इस बीच प्रत्याशी और समर्थक रोज वोटों का गुणा भाग लगाते रहेंगे।

किस बूथ पर कितने वोट पड़े, किसे कितना मिला होगा, कहां से लीड मिलेगी, कहां किसने काम किया और किसने भितरघात किया, कितने वोटों से हार या जीत होगी आदि पर दिनरात चर्चा होगी। देश में दूसरी जगहों पर चुनाव की बहार होगी और यहां जान सांसत में फंसी रहेगी। दूसरी सीटों पर समीकरण बदलेंगे तो यहां जीतने वाला प्रत्याशी हारने लगेगा, फिर किसी चरण में माहौल कुछ और होगा तो फिर समीकरण पक्ष में बताए जाएंगे। कयास लगाने के अलावा अन्य कोई काम भी तो नहीं होगा।

हर बार यही कहानी

छत्तीसगढ़ में चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में भी नतीजों के लिए एक महीने का इंतजार करना पड़ा था। छत्तीसगढ़ के साथ ही मध्यप्रदेश, राजस्थान और मिजोरम में भी चुनाव थे। आखिरी मतदान के बाद मतगणना हुई। प्रदेश में अंतिम चरण में 19 नवंबर को वोट डाले गए थे और नतीजे आए 8 दिसंबर को।

2014 के लोकसभा चुनाव में यहां अंतिम चरण की वोटिंग 24 अप्रैल को हुई थी और परिणाम आए थे 16 मई को। 2009 के लोकसभा चुनाव में वोट डाले गए 16 अप्रैल को और परिणाम आया था 16 मई को। 2004 के लोकसभा चुनाव में वोटिंग 20 अप्रैल को हुई थी और नतीजे आए थे 13 मई को। हर बार करीब एक महीने का इंतजार करना यहां के मतदाताओं की नीयत बन गया है।

बस्तर को करना पड़ता है सबसे ज्यादा इंतजार

लोकसभा हो या विधानसभा, प्रदेश में अन्य राज्यों से पहले मतदान होता है। उसमें भी सबसे पहले मतदान नक्सल प्रभावित बस्तर में कराया जाता है। इस बार बस्तर में 11 अप्रैल को वोट डाले गए हैं जबकि नतीजे 23 मई को आएंगे। ऐसा ही विधानसभा चुनाव और पिछले कई लोकसभा चुनाव में भी हुआ है। प्रदेश के अन्य हिस्सों को नतीजे के लिए जहां करीब एक महीने का इंतजार करना पड़ता है वहीं बस्तर के नेताओं और मतदाताओं को डेढ़ महीने तक इंतजार करना पड़ता है।

तब स्ट्रांग रूम की निगरानी में लगे थे टेंट

परिणाम का लंबा इंतजार कितना भारी होता है इसका नजारा चार महीने पहले संपन्न् हुए विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। कांग्रेस ईवीएम में छेड़छाड़ को लेकर आशंकित थी। तीन चुनावों से जीत की दहलीज से हार का मुंह देखने वाली कांग्रेस नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव के बाद परिणाम को लेकर आश्वस्त नहीं थी।

संदेह जताया जा रहा था कि स्ट्रांग रूम में ईवीएम में गड़बड़ी की जा सकती है। इसका तोड़ कांग्रेस ने यह निकाला कि हर स्ट्रांग रूम के सामने टेंट गाड़कर कार्यकर्ताओं को दिनरात निगरानी पर बिठा दिया। कड़कड़ाती ठंड में कार्यकर्ता स्टांग रूम के आगे रतजगा करते रहे। नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए।