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भारत के वैज्ञानिकों ने बनाया ऐसा हथियार जिसके बारे में जानकर हैरान हो गए अमेरिका और उसके पिछलग्गू यूरोपीय देश

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अमेरिका और यूरोपीय देश इन दिनों बेहद घबराए हुए हैं क्योंकि अभी तक जिस स्टेल्थ तकनीक पर उनका कब्जा था, उसे भारत के वैज्ञानिकों ने ईजाद कर लिया है। इस तकनीक के जरिए राडार की पकड़ में नहीं आने वाले ऐसे बमवर्षक विमान बनाए जाते हैं जो एक लाख फुट से अधिक ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन के घर में घुसकर बम वर्षा करते हैं और शत्रु के विमानभेदी हथियार धरे रह जाते हैं। इस तकनीक के जरिए हमलावर विमान भी बनाए जाते हैं। कहने का तात्पर्य ये कि अभी तक स्टेल्थ तकनीक वाले लड़ाकू, बमवर्षक, हमलावर विमान सिर्फ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के पास ही हैं। ये देश इन विमानों को मुंहमांगी कीमत पर भी किसी देश को नहीं बेचते।

अब भारत के वैमानिकी इंजीनियरों ने भी स्टेल्थ तकनीक का विकास कर लिया है और इस तकनीक से युक्त एडवांस मीडियम काम्बेट एयरक्राफ्ट {एमका} का डिजायन तैयार कर लिया है। विमान इंजीनियर अब इसके टेस्ट मॉडल पर काम कर रहे हैं और अगले पांच साल में यह विमान पहले टेस्ट के लिए आसमान में उड़ान भरेगा। विमान का डिजायन बनाने वाली एरोनाटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने फरवरी में कम्पनियों से एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट मांगे थे जिसके जवाब में कई सार्वजनिक और प्राइवेट कम्पनियों ने प्रस्ताव भेजे हैं।

19 से 20 टन वजन क्षमता वाले इस विमान की क्षमता पांचवीं पीढी के अमेरिकी एफ-35 लाइटनिंग ल़ड़ाकू विमान के समकक्ष होगी। दो पंख और दो इंजन वाले इस विमान की पूंछ क्षितिजीय होगी जिसमें हवा खींचने के लिए सर्पाकार इनटेक प्रणाली लगाई जाएगी। विमान की बाहरी सतह कार्बन फाइबर कम्पोजिट मटीरियल की होगी जिससे विमान दुश्मन के राडार की निगाह से बच सकेगा। जब यह विमान दुश्मन के इलाके में उड़ान भर रहा होगा तो विमानभेदी मिसाइलें इस पर निशाना नहीं लगा सकेंगी।

 

एमका के दो टेस्ट मॉडल बनाने का आर्डर हिंदुस्तान एऱोनाटिक्स लिमिटेड को दिया जाएगा। एरोनाटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के प्रोग्राम डायरेक्टर गिरीश देवधर ने पुष्टि की कि फरवरी में जारी एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट के जवाब में हिदुंस्तान एयरोनाटिक्स के अलावा कई प्राइवेट कम्पनियों ने प्रस्ताव भेजे हैं। लेकिन एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट में जो शर्तें बताई गई थीं उसे हिंदुस्तान एयऱोनाटिक्स ही पूरा कर रही है इसलिये उम्मीद है कि एचएएल को दो टेस्ट मॉडल बनाने को कहा जाएगा।

 

एमका की डिजायन एजेंसी आडा चुनी हुई कम्पनी को डिजायन सौंपेगी जो टेस्ट मॉडल बनाने के लिये जरूरी ढांचागत निर्माण खड़ी करेगी। टेस्ट मॉडल बनाने में कामयाबी मिलने के बाद इसी कम्पनी को विमान बनाने का ठेका मिलेगा। टेस्ट मॉडल बनाने वाली कम्पनी से कहा जाएगा कि एनजीटीडी-1 यानी पहले टेस्ट मॉडल की अंतिम असेम्बली का काम साढ़े तीन साल के भीतर पूरा करे और एनजीटीडी-2 का काम चार साल के भीतर पूरा करे। कम्पनी से यह भी कहा जाएगा कि पांच साल के भीतर टेस्ट मॉडल का जरूरी परीक्षण पूरा कर ले।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पिछले साल अप्रेल में संसद को बताया था कि वैमानिकी प्रोग्राम की स्टडी पूरी कर ली गई है। एमका का डिजायन बनाने वाली आडा ने ही लाइट कम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस का डिजायन बनाया था। आडा को भरोसा है कि स्टेल्थ तकनीक युक्त विमान का एक दशक बाद देश में उत्पादन शुरू हो जाएगा।

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