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हफ्ते में अगर 55 घंटे से ज्यादा महिलाएं काम करती हैं तो हो जाएं सावधान…

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आज की महिलाएं मर्दों से किसी भी मामले में कम नही हैं पर कहीं ना कहीं उनका मल्टीटास्किंग होना depression का कारण बन रहा है. यूं तो सभी की जिंदगी में परेशानियों का अंबार होता है, कोई उससे डील कर लेता है तो कोई stress को ज्यादा झेल नहीं पाता है.

हालहीं में क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में एक शोध किया गया. इस शोध में दावा किया गया है कि जो महिलाएं हफ्ते में 55 घंटे से ज्यादा काम करती हैं, उनमें Depression का खतरा अधिक होता है.यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में पोस्टडॉक्टोरल के एक छात्र और लीड शोधकर्ता गिल वेस्टन ने बताया “ये एक observational study है. हालांकि हम सटीक कारणों को स्थापित नहीं कर सकते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि कई महिलाएं पुरुषों की तुलना में घरेलू श्रम का बड़ा हिस्सा करने का अतिरिक्त बोझ उठाती हैं, जिससे कुल काम के घंटे बढ़ जाते हैं.साथ ही समय के दबाव और भारी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं.”

जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के लिए, टीम में 11,215 कामकाजी पुरुष और 12,188 कामकाजी महिलाएं शामिल थीं. इसमें ये दिखाया गया कि सप्ताहांत पर काम करना 3.4 प्रतिशत पुरुषों और 4.6 प्रतिशत महिलाओं, दोनों में अवसाद के उच्च जोखिम से जुड़ा था.शोध में बताया गया है कि पुरुषों में अवसाद के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं. 20 हजार से अधिक पुरुषों पर ये शोध किया गया जिसमें पाया गया कि उम्र, आय, स्वास्थ्य और नौकरी की विशेषताओं को ध्यान में रखने के बाद, जिन महिलाओं ने ज्यादा लंबे समय तक काम किया, उनमें सप्ताह में मानक 35 से 40 घंटे काम करने वाली महिलाओं की तुलना में 7.3 प्रतिशत अधिक depression के लक्षण पाए गए थे|आज की महिलाएं मर्दों से किसी भी मामले में कम नही हैं पर कहीं ना कहीं उनका मल्टीटास्किंग होना depression का कारण बन रहा है.

यूं तो सभी की जिंदगी में परेशानियों का अंबार होता है, कोई उससे डील कर लेता है तो कोई stress को ज्यादा झेल नहीं पाता है.हालहीं में क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में एक शोध किया गया. इस शोध में दावा किया गया है कि जो महिलाएं हफ्ते में 55 घंटे से ज्यादा काम करती हैं, उनमें Depression का खतरा अधिक होता है.यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में पोस्टडॉक्टोरल के एक छात्र और लीड शोधकर्ता गिल वेस्टन ने बताया “ये एक observational study है. हालांकि हम सटीक कारणों को स्थापित नहीं कर सकते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि कई महिलाएं पुरुषों की तुलना में घरेलू श्रम का बड़ा हिस्सा करने का अतिरिक्त बोझ उठाती हैं,

जिससे कुल काम के घंटे बढ़ जाते हैं.साथ ही समय के दबाव और भारी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं.”जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के लिए, टीम में 11,215 कामकाजी पुरुष और 12,188 कामकाजी महिलाएं शामिल थीं. इसमें ये दिखाया गया कि सप्ताहांत पर काम करना 3.4 प्रतिशत पुरुषों और 4.6 प्रतिशत महिलाओं,

दोनों में अवसाद के उच्च जोखिम से जुड़ा था.शोध में बताया गया है कि पुरुषों में अवसाद के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं. 20 हजार से अधिक पुरुषों पर ये शोध किया गया जिसमें पाया गया कि उम्र, आय, स्वास्थ्य और नौकरी की विशेषताओं को ध्यान में रखने के बाद, जिन महिलाओं ने ज्यादा लंबे समय तक काम किया, उनमें सप्ताह में मानक 35 से 40 घंटे काम करने वाली महिलाओं की तुलना में 7.3 प्रतिशत अधिक depression के लक्षण पाए गए थे|

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