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नागा साधु बनने से पहले औरतों का होता है ये खतरनाक टेस्ट… सुंदर-सुंदर महिलाएं बन जाती हैं साधु

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एक बार फिर से स्वागत है आप सभी का हमारे चैनल मैं जहां आज कि इस खास पोस्ट में हम आपको महिला नागा साध्वी के बारे में कुछ विशेष बातें बताने जा रहे हैं इन बातों को जानने के बाद आपको एहसास होगा कि किसी भी महिला का नागा साध्वी बनना इतना आसान नहीं है जितना कि हम सोचते हैं| हम आशा करते हैं हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको पसंद आएगी और आप इसे अपने सभी चाहने वालों के साथ जरूर शेयर करेंगे| तो आइए इसी के साथ जानते हैं महिला नागा साधुओं के जीवन से जुड़ी इन खास बातों के बारे में|

जैसा की आप सभी जानते हैं भारत में प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है यह कुंभ मेला प्रत्येक 12 वर्ष के अंतर में भारत के 4 राज्यों में आयोजित किया जाता है और हाल ही में साल 2019 का कुंभ मेला प्रयागराज मैं आयोजित हो चुका है| कुंभ मेले में अक्सर श्रद्धालुओं के साथ साथ नागा साधु और साध्वीयों की भारी भीड़ देखने को मिलती है जो इस मेले का आकर्षण बने रहते हैं|

एक महिला को नागा साध्वी बनने के लिए कई वर्षों की कड़ी तपस्या करनी पड़ती है और यह हर किसी के बस की बात नहीं होती क्योंकि महिला को साध्वी बनने के लिए सबसे पहले अपने गुरु का विश्वासपात्र बनना पड़ता है जिसके बाद गुरु उन्हें अपनी शिक्षा दीक्षा देना शुरू करते हैं|

महिलाओं को इसके लिए 10 से 15 वर्षों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है और इतना ही नहीं उन्हें जीते जी अपना पिंडदान भी करना पड़ता है|

नागा साध्वी बनने के लिए महिलाओं को अपने सर के पूरे बालों का दान करना पड़ता है और स्वयं का मुंडन कराकर सारी उम्र सन्यास का पालन करना पड़ता है|

महिला नागा साधुओं को अक्सर निर्वस्त्र रहने वाले साधुओं के साथ जीवन व्यतीत करना पड़ता है और ऐसे हालातों में जो महिला खुद पर संयम रख कर अपने सन्यास का पूरा पालन करती है उसे बाद में माता की उपाधि दे दी जाती है|

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