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विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए डीआरसी की हुई बैठक

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संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा, अम्बिकापुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार में अपरान्ह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रोहिणी प्रसाद जी ने कला संकाय और सामाजिक विज्ञान संकाय के कुल आठ विषयों के शोध निर्देशक एवं शोधार्थियों को संबोधित करते हुये कहा कि जो लोग नेट-सेट पास नहीं है किन्तु नियमित अध्यापक है और 28 (दा)े धारा के अंतर्गत सम्बद्ध महाविद्यालय में शिक्षक हंै, उन्हें भी विश्वविद्यालय शोध कार्य करायेगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नियमानुसार प्रोफेसर में आठ, एसोसिएट में छः और असिस्टेंट प्रोफेसर मंे चार शोध छात्र पंजीकृत हो सकते है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा आरक्षण को भी पूर्णतः लागू किया जायेगा। उन्होंने बताया कि जो एमफिल् नही है उनका कोर्सवर्क होगा, साथ ही विश्वविद्यालय में पूर्व में प्राप्त शोधोपाधिधारक शोधार्थियों का भी कोर्सवर्क कराया जायेगा। कुलपति जी ने समस्त केन्द्राध्यक्षों को निर्देशित करते हुये कहा कि विश्वविद्यालय में कोर्सवर्क के पूर्व 19 हजार रुपये प्रत्येक शोधार्थियों को जमा करना होगा तथा छः महीने कोर्स के अंतर्गत दो पेपर रिव्यू आॅफ लिटरेचर और रिसर्च मेथोलाॅजी को विभिन्न विषय -विषेज्ञयों द्वारा अध्ययन करना होगा। इसके लिए सेवारत अध्यापकों को भी शिक्षण अवकाश लेना अनिवार्य होगा। कुलपति जी ने साहित्यिक चोरी (प्लेगिरिज्म) पर चर्चा करते हुये कहा कि शोध प्रबंध में साहित्यिक चोरी (प्लेगिरिज्म) बीस प्रतिशत से अधिक नही होनी चाहिए। इस सत्र के लिये यह नियम लागू होगा किन्तु अगले सत्र में साहित्यिक चोरी (प्लेगिरिज्म) मात्र बारह प्रतिशत का अनुपात रखा जायेगा। थिसिस प्रस्तुत करने से पूर्व शोध प्रबंध की सीडी जमा करना होगा। जब साहित्यिक चोरी (प्लेगिरिज्म) की जाँच हो जायेगी और प्रमाण-पत्र मिल जायेगा तभी थिसिस का मूल्यांकन कराया जायेगा। उन्होंने शोध निर्देशक एवं शोधार्थियों को संबोधित करते हुये कहा कि छः महीने का आरंभिक समय अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है जिसंे गाइड के साथ शोध शीर्षक निश्चित करना चाहिये और शोध की समस्या का निराकरण करना चाहिये। उन्होंने शोध छात्रों को राहत देते हुये कहा कि जिस कालेज में शोध केन्द्र नहंीं है तो शोध छात्र निकट के कालेज में शोध छात्र जाकर पढ़ाई कर सकता है और शोध निर्देशक उस केन्द्र पर जाकर पढ़ा सकता है। उन्होंने विषय को गंभीरता पूर्वक चयन करने का निर्देश दिया कि प्रत्येक शोधार्थी नये ज्वलन्त विषय को लेकर शोध कार्य करें जिससे देश और समाज को लाभ मिले। इससे शोध छात्र और निर्देशक दोनो को यश मिलेगा। उन्होंने बताया कि शोध वर्क के बाद आरडीसी होगी, तत्पश्चात शोध कार्य पूर्णतः शुरू हो जायेगा। उन्हांेने यह भी बताया कि जब-जब विश्वविद्यालय में शोध कार्य का शोध व्याख्यान होगा तब सभी शोधार्थियों को उपस्थित होना अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी कहा कि एमफिल शोध छात्रों की संख्या के आधार पर शीघ्र आरडीसी भी बुलाई जा सकती है। और शोध निर्देशक की रिक्तता (रिसर्च सीट) के आधार पर आगामी माह मे पीएचडी प्रवेश परीक्षा भी कराई जा सकती है।
इस बैठक में शोध केन्द्र, संकाय प्रमुख, शोध निर्देशक और शोध छात्र चारो निर्धारित किये गये जिसमें कला एवं समाज विज्ञान संकाय के हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, भूगोल और मनोविज्ञान विषय के चैबीस शोध निर्देशक और सड़सठ शोधार्थी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय में पीएचडी हेतु विभिन्न विषयों की डीआरसी की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हुई जिसमे आज पहले दिन की बैठक मे आये हुये शोध निर्देशक डाॅ. अनिल कुमार चैधरी, डाॅ. अनिल कुमार सिन्हा, डाॅ. राजकमल चैधरी, डाॅ. राजकुमार उपाध्याय, डाॅ. उमेश कुमार शर्मा, डाॅ. मृदुला सिंह, डाॅ. उमेश पाण्डे, डाॅ. विश्वासी एक्का, डाॅ. रामकिंकर पाण्डे, डाॅ. प्रतिभा सिंह आदि उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के अधिकारी-श्री डी.पी.एस. तिवारी, श्रीमती शोभना सिंह, श्रीमती डिम्पल सिन्हा भी बैठक मे उपस्थित रहे

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