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महाभारत का यह योद्धा था इतना शक्तिशाली, यदि टिका रहता युद्ध में तो हो जाते पांडव के अंत

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महाभारत इस संसार का सबसे बड़ा धर्मग्रन्थ है | आज भी भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिया गया गीता का ज्ञान कठिन समय में मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलने को प्रेरित करता है | आज हम आपको एक ऐसे योद्धा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो युद्ध में कौरवों की ओर से था | यदि वह युद्ध में भगवान कृष्ण के आगे समर्पण नहीं करता तो उसे हारने का साहस संसार में किसी के पास भी नहीं था |

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं महामहीम भीष्म पितामह के बारे में | भीष्म अपनी प्रतिज्ञा के बल पर इतने शक्तिशाली ही चुके थे कि उन्होंने एक बार युद्ध में परशुराम को भी पराजित कर दिया था | भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध में शस्त्र न उठाने की शपथ ली थी किन्तु भीष्म के प्रहारों के आगे वे भी विवश हो गये और ऐसा समय आया कि उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा को तोड़कर युद्ध भूमि में शस्त्र उठा लिया |



जब युद्ध में भीष्म द्वारा किये गये एक के बाद एक प्रहारों से पांडवों की सेना कमज़ोर पड़ने लगी तो भगवान श्री कृष्ण के पास और कोई मार्ग न बचा और वे तुरंत अपने रथ से नीचे उतारकर भीष्म का वध के लिए रथ का पहिया लिया | समय थम सा गया और भीष्म ने अपने समक्ष भगवान विष्णु को हाथों में सुदर्शन चक्र लेकर खड़े हुए देखा |



यह देखकर भीष्म समझ गये कि उनसे बड़ी भूल हुई है और उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के आगे युद्ध में समर्पण कर दिया |

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