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महागठबंधन को लगा बड़ा झटका, शरद पवार ने लिया यू-टर्न

नई दिल्ली। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पारा चढ़ना शुरू हो गया है। बीजेपी और कांग्रेस से अलग तीसरा मोर्चा बनाने के लिए की जा रही कोशिश को बड़ा झटका लगता नज़र आ रहा है। बता दें कि नैशनलिस्‍ट कांग्रेस पार्टी NCP के अध्‍यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने कहा है कि तीसरा मोर्चा बनाना ‘व्‍यवहारिक’ नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा है कि महागठबंधन क्रियान्वित नहीं हो पाएगा। उन्‍होंने कहा, ‘सबसे पहले मुझे खुद भी महागठबंधन या किसी अन्य विकल्‍प के लिए बहुत भरोसा नहीं है। मैं निजी तौर पर महसूस करता हूं कि स्थिति वर्ष 1977 के जैसी ही है।

शरद पवार ने नहीं जताया भरोसा

शरद पवार का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा ने जल्‍द से जल्‍द तीसरे मोर्चे का निर्माण करने की मांग की है। एक मीडिया चैनल से बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि तीसरा मोर्चे के रूप में विभिन्‍न दलों का महागठबंधन व्यवहारिक नहीं है। हालांकि इस दौरान उन्‍होंने यह भी कहा कि उनके कई साथी चाहते हैं कि महागठबंधन का निर्माण किया जाए। शरद पवार ने प्रधानमंत्री पद के लिए किसी एक नाम के ऐलान से परहेज किया है, लेकिन संकेत दिया कि वर्ष 1977 में जैसे मोरार जी देसाई विजयी दलों का चेहरा बने थे, इस बार भी ऐसा ही कुछ हो सकता है।

इंदिरा गांधी जैसा हार मोदी को

मीडिया से बात करते हुए शरद पवार ने कहा जैसे 1977 में इंदिरा को हराया गया वैसे ही मोदी की स्तिथि हो सकती है। उन्‍होंने कहा, आप देखिए इंदिरा गांधी एक मजबूत इरादों वाली महिला थीं। आपातकाल के बाद वह प्रधानमंत्री थीं। उस समय कोई राजनीतिक दल नहीं था लेकिन कश्‍मीर से लेकर कन्‍याकुमारी तक जनता ने उनके खिलाफ वोट किया। जिसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस की हार हुई। तीसरे मोर्चे को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में शरद पवार ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो मैं महसूस करता हूं कि कोई महागठबंधन या तीसरा मोर्चा संभव नहीं है। मेरा अपना आंकलन है कि यह व्‍यवहारिक नहीं है। इसी वजह से यह बन नहीं पाएगा।
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