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झूठा निकला मोदी का वह बयान कि भारत पर 43,000 करोड़ का तेल का पिछला लोन उन्होंने चुकाया।

भारत पर 43,000 करोड़ रुपये का तेल का पिछला लोन था, जिसे पीएम मोदी ने चुकाया?
बहुत दिनो से सोशल मीडिया पर वाटसप यूनिवर्सिटी से एक वायरल हो रहा है. इसमें कहा गया है कि पीएम मोदी ने देश का कर्ज चुकाया है, जो पूरी तरह से गलत है. भारत की तेल कंपनियों ने ईरान से तेल खरीदा और उसे भारत में बेचा. जब इन तेल कंपनियों ने भारत में लोगों को तेल बेचा, तो लोगों से उसका पैसा लिया. कंपनियों ने लोगों से तो पैसे ले लिए, लेकिन जिस रास्ते पेमेंट होनी थी, उसमें दिक्कत के चलते वो पैसे ईरान तक नहीं पहुंच पाए. इसका सीधा सा मतलब ये है कि लोगों से लिए गए पैसे कंपनियों के पास थे, जो वो ईरान को नहीं दे पा रहे थे. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कूटनीति पैसे चुकाने का जरिया बनी और कंपनियों के पास रखे गए पैसे ईरान तक पहुंच गए. इसमें देश के लोन जैसी कोई बात नहीं थी, क्योंकि पैसा सरकार के ऊपर नहीं, निजी और सरकारी कंपनियों के ऊपर बकाया था और ये वो पैसा था, जो कंपनियां लोगों से वसूल चुकी थीं और ईरान को दे नहीं पाई थीं. यानी सीधी सी बात ये है कि उस पैसे का आज पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत से कोई वास्ता नहीं है।

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कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि सरकार ने ईरान को 43,000 करोड़ रुपये का कर्ज तो चुकाया है. लेकिन ये कर्ज भारत सरकार पर नहीं था. ये कर्ज था तेल कंपनियों पर, जिन्होंने तेल के बदले आम आदमी से पैसे वसूल लिए थे. अब उनके खाते में जमा पैसे को भारत सरकार ने ईरान के हवाले कर दिया है. इसलिए इस 43,000 करोड़ रुपये का बोझ हमारे सरकारी खजाने पर नहीं पड़ा है. अब अगर आपको कोई तेल के दाम बढ़ने के पीछे इस लॉजिक को दे, तो उसे सिरे से खारिज़ करिए और उस तक सही बात पहुंचाइए।
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