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उम्र और समय से अप्रभावित रहे आपका वैवाहिक जीवन

विवाह के पश्चात् के प्रथम दो-तीन वर्ष तो नए उमंग व उत्साह से भरे होते हैं पर जैसे-जैसे समय  अपने कदम आगे बढाता जाता है, वैवाहिक जीवन की उमंग व उत्साह कहीं गुम हो जाते हैं। जिंदगी में से नयापन गायब हो जाता है और सब रूटीन हो जाता है। अक्सर महिलाएं अपने जीवन साथी से ज्यादा अपने बच्चों पर ध्यान देती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी पहली जिम्मेदारी बच्चे हैं पर इस बीच उनका वैवाहिक जीवन डिस्टर्ब हो जाता है।

पति भी जब महसूस करता है कि उसकी पत्नी का ध्यान उसकी तरफ नहीं है तो वह अकेलापन महसूस करता है और कई बार तो ऐसी स्थितियां भी बन जाती हैं कि पति अपना अकेलापन बांटने के लिए दूसरे रिश्ते स्थापित कर लेता है। परिणामस्वरूप वैवाहिक रिश्ता बिगडने लगता है। यह सही है कि एक औरत को एक बेटी, पत्नी, एक मां और कई फर्ज निभाने पडते हैं पर सबसे अधिक महत्त्व विवाह को देना आवश्यक है अर्थात अपने जीवन साथी को महत्त्व देना आवश्यक है क्योंकि जीवन साथी के पश्चात ही बच्चे, काम व अन्य रिश्ते आते हैं।
जीवन साथी एक केन्द्रीय धुरी है और सब रिश्ते उसके आस-पास घूमते हैं। जितना मजबूत आपका रिश्ता अपने जीवन साथी से होगा, उतनी ही मजबूती आपकी अन्य रिश्तों से बनेगी। कहीं आपका वैवाहिक जीवन भी किन्हीं कारणों से रूटीन तो नहीं बन रहा है या आप अपने जीवन साथी की उपेक्षा तो नहीं कर रही हैं? कुछ बातों पर गौर कीजिए ताकि आप का वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहे और आपका जीवन साथी सदा आपको प्यार करता रहे और उम्र व समय के बढते दौर में वैवाहिक जीवन की उमंग, रस, उत्साह हमेशा बने रहें….
सबसे पहले तो आप यह कोशिश न करें कि आपका विवाह एक अफेयर बने क्योंकि अफेयर विवाह जैसे मजबूत रिश्ते की तरह लंबा व परिपक्व नहीं होता, इसलिए मेच्योर बनिए। यह मानिए व समझिए कि वैवाहिक जीवन की खुशियों के लिए कई बार कुछ ऐसा भी करना पडता है जो आप न चाहते हों। वैवाहिक जीवन में जितना आप अपने जीवन साथी को खुशियां देने के बारे में सोचेंगे, आपका वैवाहिक जीवन व संबंध उतना ही मजबूत बनेंगे।
आपकी पहली प्रमुखता आपके पति होने चाहिए। बच्चों पर ध्यान दें पर पति की उपेक्षा न करें। एक मां बनने से पूर्व आप एक पत्नी हैं और मां बनने से पूर्व आप अपने जीवन साथी का ख्याल रखती थीं। उस बारे में लापरवाही न बरतें। मां का दायित्व संभालने के बाद भी अपने पति का पूरा ध्यान रखें।
बच्चे पैदा होने के बाद महिलाएं उनके महत्त्व के आगे अपने जीवन साथी की इच्छाओं का बलिदान दे देती हैं। बच्चे महत्त्वपूर्ण हैं और आपका जीवन साथी भी उतना ही महत्त्व रखता है। अगर आपकी सेक्स लाइफ अच्छी है तो आपके वैवाहिक जीवन में उमंग और उत्साह बना रहता है।
विवाह के बाद के शुरू के वर्षों में तो पत्नी अपने पति की हर इच्छा को महत्त्व देती है पर बाद में ओवरबर्डन होने के कारण सब महत्त्वहीन लगता है पर ऐसा नहीं होना चाहिए। अपने पति के लिए सजिए संवरिये। उनकी पसंद, नापसंद पर ध्यान दीजिए। ओवर बर्डन हों, तब भी अपने पति के ऑफिस लौटने के समय उनकी पसंद की साडी, सूट पहनकर तैयार होकर उनके स्वागत के लिए तैयार रहें ताकि उन्हें महसूस हो कि आप कितनी बेसब्री से उनका इंतजार कर रही थीं।
पति की ओर ध्यान दें। उनकी जरूरतों पर ध्यान दें। ऐसा न हो कि आपके व्यवहार की वजह से पति दूसरी औरतों में रूचि लेने लगे और आपका दांपत्य जीवन मुसीबत भरा हो जाए।
अपने स्वास्थ्य व सौंदर्य की तरफ ध्यान दें। अपने को फिट रखें व आकर्षक दिखें। इससे आपके पति आपके वश में रहेंगे और उन्हें बाहर झांकने की आवश्यकता ही महसूस नहीं होगी। विवाह होते ही बहुत सी स्त्रियां अपने शारीरिक सौंदर्य के प्रति लापरवाह हो जाती हैं। सफल पत्नी के लिए आवश्यक है कि वह पति के लिए आकर्षक बनी रहे।
परफेक्ट पत्नी बनने के लिए अपने पति की भावनाओं को समझें और उनकी कद्र करें। बहुत डोमिनेटिंग न बनें।
अपने पति की छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें। उनके बर्थडे, मैरिज एनिवर्सरी पर उन्हें कुछ न कुछ उपहार दें। उस दिन उनके साथ बाहर घूमने जाएं। ये महत्त्वपूर्ण पल आपके लगाव और प्यार को बढाते हैं इसलिए उन्हें सेलीब्रेट करें पर मेहमान आप दोनों ही हों, कोई तीसरा नहीं।
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